हज़रत ईसा (अलै.) का वाक़या
(बिन बाप के पैदाइश, मोज़िज़े और आसमान पर उठाए जाने की दास्तान)

1. बीबी मरयम की इबादत और हज़रत ईसा (अलै.) की मुक़द्दस पैदाइश

हज़रत ईसा (अलै.) का वाक़या इंसानियत के इतिहास में एक अनूठा चमत्कार है। बैतूल मक़दिस की पाक दामन ख़ातून हज़रत मरयम (स.अ.) अपना ज़्यादातर वक़्त अल्लाह की इबादत में गुज़ारती थीं। एक दिन अल्लाह ताला ने अपने फ़रिश्ते हज़रत जिब्रील को उनके पास भेजा। फ़रिश्ते ने उन्हें एक पाक और मुक़द्दस बेटे की ख़बर दी।

हज़रत मरयम हैरान हुईं और फ़रमाया कि बिना किसी इंसान के छुए मुझे बच्चा कैसे हो सकता है? फ़रिश्ते ने कहा कि यह अल्लाह का हुक्म है और अल्लाह जब किसी काम का इरादा करता है, तो सिर्फ कहता है 'हो जा' (कुन) और वह काम हो जाता है। बिना पिता के, केवल अल्लाह के कुदरत के करिश्मे से हज़रत ईसा (अलै.) की पैदाइश हुई।

2. झूले (गोद) में बोलना और अपनी मां का पाक-दामन साबित करना

जब हज़रत मरयम नवजात शिशु को लेकर अपनी कौम के पास पहुंचीं, तो लोगों ने उन पर तरह-तरह के इल्ज़ाम लगाने शुरू कर दिए। हज़रत मरयम ख़ामोश रहीं और उन्होंने बच्चे की तरफ इशारा कर दिया।

लोगों ने कहा कि हम एक झूले के छोटे बच्चे से कैसे बात कर सकते हैं? तभी अल्लाह की कुदरत से कुछ ही दिनों के मासूम हज़रत ईसा गोद में साफ़ और सुरीली आवाज़ में बोल उठे:

"मैं अल्लाह का बंदा हूँ। उसने मुझे किताब (इंजील) दी है और मुझे नबी बनाया है। उसने मुझे जहाँ भी रहूँ मुबारक बनाया है और जब तक मैं ज़िंदा रहूँ, मुझे नमाज़ और ज़कात की ताकीद की है।"

एक छोटे से मासूम बच्चे की ज़ुबान से यह बात सुनकर कौम के लोग भौचक्के रह गए और हज़रत मरयम की पाकीज़गी साबित हो गई।

3. हज़रत ईसा (अलै.) के महान मोज़िज़े (चमत्कार)

जब हज़रत ईसा (अलै.) बड़े हुए, तो अल्लाह ताला ने उन्हें अपनी पैगंबरी से नवाज़ा और इंजील नाम की किताब अता की। अपनी कौम को सच्चाई के रास्ते पर लाने के लिए अल्लाह ने उन्हें ऐसे-ऐसे मोज़िज़े (चमत्कार) अता किए, जिन्हें देखकर लोग हैरान रह जाते थे:

4. दस्तरख़्वान (माइदा) का मोज़िज़ा

हज़रत ईसा (अलै.) के वफ़ादार साथियों (हवारियों) ने एक बार गुज़ारिश की कि ऐ ईसा! क्या आपका रब हमारे लिए आसमान से खाने से सजा हुआ दस्तरख़्वान (थाली) उतार सकता है, ताकि हमारे दिलों को तसल्ली मिले और हम ईद जैसा जश्न मना सकें?

हज़रत ईसा ने अल्लाह से दुआ की। अल्लाह ने उनकी दुआ क़बूल की और आसमान से जन्नत के लज़ीज़ ख़ानों से भरा हुआ दस्तरख़्वान नाज़िल फ़रमाया, जिसे देखकर सभी हवारियों और ग़रीबों ने भरपेट खाना खाया।

5. यहूदियों की साज़िश और आसमान पर उठाए जाना

हज़रत ईसा की बढ़ती लोकप्रियता और चमत्कारों को देखकर उस दौर के धर्मगुरु और यरूशलेम के शासक उनसे जलने लगे। उन्हें लगा कि उनका वर्चस्व ख़त्म हो जाएगा। उन्होंने हज़रत ईसा को कत्ल करने की भयानक साज़िश रची।

उन्होंने एक रात उस मकान को घेर लिया जहाँ हज़रत ईसा मौजूद थे। लेकिन अल्लाह ने अपने नबी की हिफ़ाज़त का अनोखा इंतज़ाम किया। अल्लाह ताला ने साज़िश करने वाले दुश्मनों में से एक गद्दार शख्स (यहूदा असकीर्योती) की शक्ल हूबहू हज़रत ईसा जैसी बना दी। दुश्मनों ने उसी शख्स को हज़रत ईसा समझकर पकड़ लिया और सूली पर चढ़ा दिया।

जबकि असल हज़रत ईसा (अलै.) को अल्लाह ताला ने ज़िंदा सही-सलामत आसमान पर उठा लिया।

6. कयामत के करीब हज़रत ईसा (अलै.) की वापसी

इस्लामिक मान्यताओं के अनुसार, हज़रत ईसा (अलै.) को न तो कत्ल किया गया और न ही सूली दी गई। वे आज भी आसमान पर ज़िंदा हैं। कयामत के करीब, जब दुनिया में दज्जाल नाम का बड़ा फ़ित्ना फैला होगा और अत्याचार बढ़ जाएगा, तब अल्लाह ताला हज़रत ईसा (अलै.) को दोबारा ज़मीन पर उतारेगा। वे दज्जाल का ख़ात्मा करेंगे, दुनिया में न्याय और शांति फैलाएंगे और अपनी कुदरती मौत पूरी करेंगे।

प्रामाणिक संदर्भ एवं हवाले (References)

  1. क़ुरआन मजीद: सूरह मरयम (आयात 16 से 36) - हज़रत ईसा (अलै.) की पैदाइश और झूले में बोलने का वर्णन।
  2. क़ुरआन मजीद: सूरह आल-इमरान (आयात 45 से 55) - हज़रत ईसा के मोज़िज़ों (चमत्कारों) और आसमान पर उठाए जाने का उल्लेख।
  3. क़ुरआन मजीद: सूरह अल-माइदा (आयात 112 से 115) - आसमान से खाने के दस्तरख़्वान उतरने का वाक़या।
  4. क़ुरआन मजीद: सूरह अन-निसा (आयात 157 से 158) - सूली न दिए जाने और अल्लाह द्वारा अपने पास उठाए जाने की पुष्टि।
  5. कसासुल अंबिया: इब्ने कसीर (हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम के जीवन की विस्तृत प्रामाणिक दास्तान)।
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